उत्कंठा
किसी भी कार्य को करने के लिए
उत्कंठा का होना आवश्यक है
बलात् किए जाने वाले कार्य
अनमने ढंग से किया जाता है
ऐसे में कार्य की सफलता
सदैव संदिग्ध बनी रहती है।
कार्य में उत्कंठा का
होता है जब समावेश
उत्साह का संचार होता है
कार्य में कुशलता आती है
कार्य करने वाला
आनंद का अनुभव करता है।
स्वेच्छा से किए जाने वाले कार्य में
उत्कंठा के समावेश से
कार्य में नवीनता आती है
स्वरूप में निखार आता है
कला का अनोखा रूप प्रकट होता है।
करें जब भी कोई कार्य
पूरे मनोयोग से करें
जिजीविषा के साथ करें
मन में उत्साह लेकर करें
कार्य को करने के लिए
लालायित रहें, उत्कंठित रहें
– डॉ. लूनेश कुमार वर्मा
डॉ लूनेश कुमार वर्मा
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