शीर्षक— नन्हीं गौरैया
पहले सुबह आंखे खुलती थीं
चहकती हुई नन्हीं सी चिड़िया गौरैया से
सुबह पहले की
गौरैया के शोर से
इधर उधर उड़ते हुए
चहचह की आवाजें एक साथ कानों पर आती थीं
उस आवाज में जैसे एक उमंग
एक खुशी एक सकारात्मकता एक नई ऊर्जा रहती थी
उनका खुशी से इधर उधर आकाश में उड़ना
जीवन में
कुछ करने का एक हौसला जैसे देता था
जो हम सबको एक नई प्रेरणा और
जीवन में आगे बढ़ने का संकेत था
अब गौरैया नहीं चहकती
आखिर क्यों
कहां गई
किसने उसको लाकर
खड़ा किया विलुप्ति की कगार पर
मानव ने,
ना जाने कितने मोबाइल टावर लगाए
निकला जिससे खतरनाक रेडिएशन
जिसने गौरैया की प्यारी आवाज को दबा दिया
क्योंकि हमे आदत हो गई है
मोबाइल में बजने वाले अलार्म की
इस अलार्म के आगे
गौरैया की नन्हीं आवाज नहीं आयेगी
वो अभी भी है
चहकती है
लेकिन हमे आपको उसका चहकना नहीं सुनाई देता
वो बताती है अपना दर्द
बताती है अपना कष्ट
जगना कभी भोर में
घर के बाहर निकलना तब सुन पाओगे
उसकी दर्द भरी आवाज
जो पहले हमारे घरों में
घर के पास लगे पेड़ों में
सुनाई देती थी खुशी से झूमती थी खिलखिलाती थी
खूब चहकती थी
अब इधर वो चहकना बंद है
उस प्यारी सी गौरैया का
हमारी नन्हीं सी चिड़िया का...!!!!!😔
No comments:
Post a Comment