प्रिये
तेरा मेरा साथ हो
कोई नहीं आस-पास हो
हाथों में हाथ हो
मन में विश्वास हो।
प्रकृति में बहार हो
लालिमा का संचार हो
मन भी तैयार हो
हम दोनों में प्यार हो।
निकल पड़े कहीं हम
सागर का तट हो
प्रकृति रूप अनुपम
सूरज मद्धम हो।
हाथों में हाथ हो
एक दूसरे का विश्वास हो
दुनिया अपनी हो
सदा प्रेम का संचार हो।
एक दूसरे का साथ हो
सूर्यास्त का समय हो
लहरों की बातें हों
प्रेम की सौगात हों।
वातावरण सुखद हो
प्रेमी युगल का मिलन हो
लहरों का आगमन हो
हृदय में प्रिये उमंग हो।
– डॉ. लूनेश कुमार वर्मा
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