ओस की बूंदें - डॉ. लूनेश कुमार वर्मा
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शीतकाल की रजनी
शस्य श्यामला धरित्री
चहुं ओर हरीतिमा
स्वच्छ वातावरण
उषा काल की बेला
छोटे-छोटे तृणों के सिर
शोभायमान ओस की बूंदे
चमकते मोती सम
लगते मनोरम।
निकलते जो प्रातः
पाते सुखद अनुभव
स्वास्थ्य हितकारी
ओस की बूंदें मनोहारी।
खेत खलिहान मैदानों में
बिखरे आनंदमय दृश्य
प्रकृति रूप अनुपम
शीतलता सुखदायक
ओस की बूंदें मंगलकारक।
जीवन क्षणभंगुर इनका
अल्पकाल में हर्षवर्धन
करता अपना जीवन सफल
देता सीख जगत को
लो जीवन का आनंद सदा।
डॉ. लूनेश कुमार वर्मा
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