विषय-मेरे जीवन साथी
विधा-कविता
तुम ही हो मेरे जीवन साथी ।
तुम ही से मेरी अयोध्या काशी ।।
खाती हूं कसम मैं सदा तेरे साथ रहूं ।
तुझसे ही मैं सदा सच्चा प्यार करूं ।।
तुमसे ही है मेरे सदा जीवन डोर ।
तुम ही हो मेरे सदा सच्चे चितचोर ।।
हाथों में मेरे तेरा सदा हाथ रहे।
टूटे ना ये बंधन सदा हम साथ रहें।।
तेरा मेरा है ये जन्मों-जन्मों रिश्ता ।
सुबह-शाम करूं मैं तुम्हें ही सजदा ।।
मेरा और तेरा सदा ही ये बंधन रहे।
एक दूजे को हम सदा वंदन करते रहे ।।
तूने किया मुझ पर न जाने क्या जादू ।
मेरा मुझ रहा ना अब कोई काबू ।।
तुझ बिन मेरा कहीं मन नहीं लगता ।
जैसे मृग कस्तूरी को जंगल फिरें ढूंढता।
स्वरचित और मौलिक कविता
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत
Very nice sir ji
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