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Tuesday, October 15, 2024

तेरा मेरा साथ : विभूति सिंह ' विख्यात'

तेरा मेरा साथ हो ,
गेरुआ आकाश हो।
हाथों में तेरा हाथ हो, 
जीवन भर का साथ हो l

मौसम का मिजाज भी, 
थोड़ा सा आशिकाना हो। 
तेरे दिल में रहूं मैं, और 
मेरे दिल में तेरा आशियाना हो।

तेरी रेशमी जुल्फें, 
मेरे कंधे पर करती हो अठखेलियां,
आंखें तेरी मुझ से पूछे, 
कुछ सरल सी पहेलियां।

यूं ही कुछ रंगीन शामें,
संग तुम्हारे बीते।
कट जाएं ये जीवन सारा,
गीत मिलन के गाते गाते।

विभूति सिंह ' विख्यात'

तेरा साथ : सूबेदार राम स्वरूप कुशवाह

तेरा मेरा साथ हों, 
हाथों में तेरा हांथ हों।
उगते सूरज की लालिमा,
वाह फिर क्या बात हो।।

तुम मुझे और मैं तुम्हें,
बस देखता ही रहूं।
न कुछ तुम कहो,
न  कुछ मैं कहूं।।

एक अजब सी चमक,
चहरे पर दिखती तेरे।
बड़े ही सुन्दर लगते हैं,
 बाल ए बिखरे तेरे।।

न शहरों का शोरगुल,
न गांवों की तांका झांकी।
एक तुम हो एक हम हैं,
पीछे रह गई दुनिया बाक़ी।।

जो सुकून तेरे साथ में,
वो स्वर्ग में भी हैं नहीं।
तेरे जैसा यार स्वरूप 
और कोई मेरा नहीं।।

 ए समय कास ठहर जायें,
मौसम सुहाना मन भाए।
सजनी संग साजन मिल,
प्रीति प्यार के गीत गाए।।
सूबेदार रामस्वरूप कुशवाह बैंगलौर कर्नाटक 
स्वरचित कविता 15/10/2024

मेरी कलम से : लोकेश कौशिक

दूर ढलते सूरज सी रोशनी सा,
प्यार हमारा कहीं खो ना जाए प्रिया,
जमाना कभी नहीं हुआ इस जहां में 
किसी का सच्चा प्यार नहीं बदलता कभी प्रिया।

आओ अब दिन ढल गया है,
अब बिछड़ने का समय हो गया है 
पंछी भी घोंसलों को लौट गए हैं 
लहरें भी शांत किनारों में खो गई हैं 
अब हम ही किनारे पर खड़े रह गए हैं।

© लोकेश कौशिक 

सीखना : डॉ. लूनेश कुमार वर्मा

सीखना ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• व्यक्ति जीवन भर सीखता है  व्यक्ति में सीखने की ललक  सदा बनी रहनी चाहिए  जिस दिन व्यक्ति ...